राजनीति और हमारा समाज

राजनीति और हमारा समाज

आज के दौर में राजनीति व समाज
     
      हिंदुस्तान के इतिहास में ऐसे कई तारीख नासूर बन कर आज भी जिंदा हैं, जो हिंदुस्तान के आने वाले नस्लों को चीख-चीख कर बताता रहेगा कि राजनीति का रंग कैसा होता है। समाज में राजनीति का अहम रोल है



क्या वाकई भारत में मानवधिकारों का उल्लंघन हो रहा है?


  मानवाधिकार का उल्लंघन यहां कई बार हुआ है। इस पर अमेरिका भी भारत को कई बार सुना चुका है लेकिन सियासत के आगे सब बौने हो जाते हैं।

हमारे भारत में एक सबसे बड़ा मुद्दा है बाल विवाह जो सरकार के द्वारा बनाए कानूनों से भी बाल विवाह नहीं रुक पा रहा है आखिर क्यों ?





समाज
   आज के दौर के नेता इसी समाज को बांट कर उसकी एकता और अखंडता को खत्म कर रहे हैं। फिर जाति और वर्ग के नाम पर नफरत फैला कर सत्ता का रास्ता तय करते हैं। ऐसे में समाज के अंदर जम कर मानवाधिकार का हनन होता है।



राजनीति से किस प्रकार संविधान को खतरा है?


हम जिस दौर में रह रहे हैं, उस दौर की राजनीति अब तक की राजनीति से सबसे ज्यादा खतरनाक है। आज के दौर की राजनीति इस कदर बेजुबान हो गई है कि उसका कोई अपना मूल्य नहीं बच गया है। सियासत के पुरोधा जाति के नाम पर सत्ता तय कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मानव मूल्यों की अब कोई कदर नहीं है। संविधान के हिसाब से जिन चीजों को तय किया गया था वो अब खत्म होता जा रहा है। ऐसे में आज की राजनीति जो मानव मूल्यों के खिलाफ हो रहा है वो अप्रत्यक्ष तौर पर संविधान के लिए भी खतरा बनता जा रहा है।

जैसे कि बरवाला कांड 2014 यह बरवाला कांड भी एक बहुत बड़ी राजनीतिक साजिश के तहत ही करवाया गया था


 सच्ची घटना
इस कांड में एक निर्दोष संत और उनके 950 अनुयायियों जिनका  कोई दोष नहीं था  बिल्कुल निर्दोष लोगों को झूठे केस बनाकर हिसार जेल में भर दिया गया और उनके साथ बड़ी ही क्रूरता के साथ अत्यधिक अत्याचार किए गए जो हमारे समाज के लिए बहुत बड़े ही शर्म की बात है
अब हमारे समाज की युवा पीढ़ी को जागने की जरूरत है
 


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